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उत्तर प्रदेश के औरैया में सड़क दुर्घटना में 24 प्रवासी मज़दूरों की मौत, 37 घायल

कोरोना की मार के चलते पूरे देश में लॉक डाउन लागू है. ऐसे में हजारों प्रवासी मजदूर अलग-अलग राज्यों से अपने घरों की तरफ पैदल ही निकल पड़े हैं. उनके सामने कोरोना अकेली परेशानी नहीं बल्कि भूख भी इनके लिए जानलेवा साबित हो रही है. ताजा खबर उत्तर प्रदेश औरैया जिले से है, जहां 24 मजदूरों की मौत सड़क हादसे में हो गई. जबकि 37 मजदूर घायल हो गए. इनमें से गंभीर रूप से घायल 14 मजदूरों को सैफई (इटावा) के पीजीआई में भर्ती कराया गया है. जहाँ वो जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं.


यह घटना मिहौली इलाके में शनिवार तड़के तीन बजे से 3:30 बजे के बीच हुई. राजस्थान की ओर से आ रहा ट्रक दिल्ली की ओर से आ रहे डीसीएम वैन से टकरा गया. इस ट्रक में लगभग 50 मजदूर सवार थे. कानपुर के पुलिस महानिरीक्षक मोहित अग्रवाल ने बताया, ‘शनिवार सुबह एक डीसीएम वैन दिल्ली से मजदूरों को लेकर आ रही थी. इनमें से कुछ मजदूर औरैया और कानपुर देहात मार्ग पर वैन को रोककर सड़क किनारे एक चाय की दुकान पर चाय पी रहे थे, तभी राजस्थान के जयपुर से मजदूरों को लेकर आ रहे एक ट्रक ने इस वैन को टक्कर मार दी. टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों वाहन सड़क किनारे बने गड्ढे में जा गिरे.’

ट्रक में चूने की बोरियां लदी हुई थीं जिनके बीच मजदूर सो रहे थे. हादसे के बाद ट्रक के भीतर से चूने में दबे शवों को एक-एककर बाहर निकाला गया. इनमें से ज्यादातर मजदूर बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के हैं. चश्मदीदों के मुताबिक, यह हादसा उस वक्त हुआ जब कई मजदूर डीसीएम रोककर चाय पी रहे थे. बताया जा रहा है कि हादसे में मरने वाले मजदूरों की तादाद कहीं ज्यादा होती अगर वे चाय पीने के लिए उतरे नहीं उतरते. मरने वालों में से ज्यादातर मजदूर टक्कर मारने वाले ट्रक में सवार थे.

केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों को दिए निर्देश

इसी बीच केंद्र सरकार ने राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों से कहा है कि सड़कों और रेलवे की पटरियों पर प्रवासी मजदूरों को देखने पर वे उन्हें खाना और आश्रय मुहैया कराएं और यह सुनिश्चित करें कि वे अपने गंतव्य तक विशेष ट्रेनों में जा सकें. सभी राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन को लिखे पत्र में केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने कहा कि अभी भी देश के विभिन्न हिस्सों में सड़कों, रेलवे ट्रैक और ट्रकों में प्रवासी मजदूर जाते हुए दिख रहे हैं.

उन्होंने कहा कि राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को पहले भी सलाह दी गई थी कि प्रवासी मजदूर अगर रास्ते पर चलते दिखे तो उन्हें समझाया जाए और समीप के आश्रय स्थलों में ले जाकर उनके खाने और पानी की व्यवस्था की जाए, जब तक कि वे अपने गंतव्य जाने के लिए श्रमिक विशेष ट्रेन या बस न पकड़ लें. भल्ला ने कहा कि सरकार ने श्रमिक विशेष ट्रेनों और बसों में प्रवासी मजदूरों की यात्रा की अनुमति दे दी है ताकि वे अपने-अपने ठिकानों पर पहुंच जाएं.

अधिकारियों पर होगी कार्रवाई

पैदल, साइकल या ट्रकों में भरकर आ रहे प्रवासियों को लेकर योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कहा है कि अब जिले के अधिकारियों पर कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि वह बार-बार कह रहे हैं कि कोई भी श्रमिक पैदल न चले। उन्होंने औरैया मामले में भी मथुरा और आगरा के एसएचओ को सस्पेंड किया है। इसके अलावा डीएसपी को कठोर चेतावनी दी हैं। आईडी, डीआईडी स्तर के अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है। अब अगर प्रवासी कहीं भी पैदल चलते हुए या ट्रकों में इस तरह भरकर आते हुए नजर आए तो जिले के अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

पहले भी सड़क हादसों में जान गावं चुके हैं मज़दूर

बीती 14 मई की देर रात उत्तर प्रदेश के जालौन और बहराइच में दो अलग-अलग सड़क दुर्घटनाओं में तीन प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई, जबकि 71 अन्य घायल हो गए थे. 13 और 14 मई को तीन अलग-अलग हादसों में 15 मजदूरों की मौत हो गई थी. उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में एक बस से कुचलकर छह प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई, जबकि चित्रकूट में ट्रक की टक्कर से एक मजदूर की मौत हो गई. मध्य प्रदेश में बस की टक्कर से ट्रक में सवार आठ प्रवासी श्रमिकों की मौत हो गई. इन हादसों में 60 से अधिक प्रवासी मजदूर घायल हो गए थे. इससे पहले महाराष्ट्र के औरंगाबाद में एक मालगाड़ी की चपेट में आने से रेल पटरियों पर सो रहे 16 प्रवासी मजदूरों  की मौत हो गई थी. ये प्रवासी मजदूर अपने गृहराज्य मध्य प्रदेश लौटने के लिए श्रमिक विशेष ट्रेन में सवार होने के लिए महाराष्ट्र के जालना से भुसावल जा रहे थे. रास्ते में थकान के कारण वे रेल पटरियों पर ही सो गए थे.

सिर्फ नाम के लिए हैं मज़दूरों के हित में बने कानून

कहने को इन प्रवासी मजदूरों के हितों और संरक्षण के लिए एक नहीं बल्कि दो-दो कानून बने हैं. मगर लॉकडाउन के दौरान इन दोनों कानूनों की धज्जियां उड़ रही हैं. मज़दूरों की सुरक्षा और उनके हितों के लिए देश में 2 कानून बनाये गए, पहला 1979 में अंतरराज्यीय प्रवासी मज़दूर अधिनियम बनाया गया और दूसरा 2014 में स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट .

अंतरराज्यीय प्रवासी मज़दूर अधिनियम

इस कानून के तहत अगर कोई कंपनी या फैक्ट्री दूसरे राज्यों से आए मज़दूरों को काम पर रखती है और ऐसे मज़दूरों की तादाद 5 से या उससे ज़्यादा है तो ये अधिनियम उस कंपनी या फैक्ट्री पर लागू होगा. लेकिन ज़्यादातर कंपनियां इस कानून से बचने के लिए सीधे तौर पर नौकरियां ना देकर एजेंसियों या कांट्रैक्टरों के ज़रिए भर्तियां कराती हैं. ताकि वो खुद को इस कानून से बचा सकें और कांट्रैक्टर इस कानून से बचने के लिए 11-11 महीने का कॉन्ट्रैक्ट करते हैं ताकि वो इसके दायरे में ना आ सकें. इस तरह किसी कंपनी में काम करके भी ये अंतरराज्यीय प्रवासी मज़दूर उस कंपनी का हिस्सा नहीं बन पाते हैं और उन तक सरकार की योजनाओं का लाभ नहीं पहुंचता.

स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट 2014

इस कानून के तहत सड़कों पर दुकान लगाने वाले जिन्हें स्ट्रीट वेंडर्स कहते हैं. उन्हें इसका लाइसेंस दिया जाएगा ताकि उनका रिकॉर्ड सरकार के पास हो. जिसमें वेंडर का नाम, पता और वेंडिंग की जगह होती हैं. इस नियम के तहत ये सुनिश्चित किया जाता है कि उन्हें कोई परेशान न करे. हालांकि हकीकत ये है कि देश में जितने लाइसेंसी स्ट्रीट वेंडर्स हैं उससे कई गुना ज़्यादा तादाद में गैर लाइसेंसी स्ट्रीट वेंडर्स हैं जो दूसरे राज्यों से आए हुए हैं.और पुलिस के रहमो-करम या कहें उन्हें खुश कर यहां-वहां अपनी दुकान लगाते हैं. ऐसे लोगों का सरकार के पास कोई रिकार्ड नहीं.

पीएम मोदी ने भी जताया शोक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घटना पर शोक जताते हुए ट्वीट कर कहा, ‘उत्तर प्रदेश के औरैया में सड़क दुर्घटना बेहद ही दुखद है. सरकार राहत कार्य में तत्परता से जुटी है. इस हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों के प्रति अपनी संवेदना प्रकट करता हूं, साथ ही घायलों के जल्द से जल्द स्वस्थ होने की कामना करता हूं.’

सीएम योगी ने सीए जांच के निर्देश

इस पूरे मामले पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट कर कहा, ‘जनपद औरैया में सड़क दुर्घटना में प्रवासी कामगारों/श्रमिकों की मृत्यु दुर्भाग्यपूर्ण एवं दुखद है. मेरी संवेदनाएं मृतकों के शोक संतप्त परिजनों के साथ है. पीड़ितों को हरसंभव राहत प्रदान करने, घायलों का समुचित उपचार कराने व दुर्घना की त्वरित जांच करवाने के निर्देश भी दिए हैं.’

सीएम योगी ने साधा राहुल गांधी पर निशाना

योगी आदित्यनाथ ने इशारों-इशारों में कांग्रेस लीडर राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आज उनको अपने कृत्यों के बारे में सोचना चाहिए। जो लोग आज पारदर्शी व्यवस्था पर ऊँगली उठा रहे हैं वह सोचे जब एक दल विशेष के लोग रुपया चट कर जाते थे। गरीबों को कुछ नहीं मिलता था। आज गरीबों के खाते में सीधे रुपया जा रहा है।

अखिलेश यादव ने कहा प्रति मृतक 10 लाख दे सरकार

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने ट्वीट कर कहा, ‘घर लौट रहे प्रवासी मजदूरों के मारे जाने की खबरें दिल दहलाने वाली हैं. मूलत: ये वो लोग हैं जो घर चलाते थे, इसलिए समाजवादी पार्टी प्रदेश के प्रत्येक मृतक के परिवार को एक-एक लाख रुपये की मदद पहुंचाएगी. नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए निष्ठुर भाजपा सरकार भी प्रति मृतक 10 लाख रुपये की राशि दे.’

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