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सद्भावना ट्रस्ट की ओर से महिला दिवस पर ठाकुरगंज में एक कार्यक्रम का हुआ आयोजन

लखनऊ। सद्भावना ट्रस्ट लखनऊ ने दिल्ली के सहयोग से समुदाय की युवा महिलाओं के साथ महिला दिवस समारोह एवं तोड़ी बंदिशें कोविड- में शादियां अभियान के समापन कार्यक्रम का आयोजन किया।

यह कार्यक्रम ठाकुरगंज में संचालित किया गया। कोरोना महामारी को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम को समुदाय के बीच में आयोजित किया गया, जिसमें संस्था के कार्यक्रम से जुड़ी 100 महिला प्रतिभागियों को ही आमंत्रित किया गया। अतिथि के रूप में क्षेत्र की पार्षद गीता पांडे, स्ट्रीट आर्टिस्ट सबिका नकवी, आशा बहू ममता, सामाजिक कार्यकर्ता तिताश, कंप्यूटर प्रशिक्षक उजमा खातून, ग्राफिक डिजाइनर अमृत, अरूंधति, यूथ लीडर हिंदूजा वर्मा, तहरीम और समुदाय लीडर सबीहा, हुमा, मरियम, बुशरा और समरीन मौजूद रही। अतिथियों द्वारा रंग बिरंगे गुब्बारे पर महिलाओं के लिए शुभकामनाओं का संदेश लिखकर गुब्बारों को आकाश में उड़ा कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया। इसके बाद कार्यक्रम में युवा महिलाओं द्वारा नृत्य पेश किया गया। कार्यक्रम के दौरान क्षेत्रीय पार्षद द्वारा महिला की गतिशीलता और हर काम में उनकी भागीदारी की सराहना करते हुए उन्हें जीवन में आगे बढ़ने की शुभकामनाएं दी गईं। कार्यक्रम में किशोरियों द्वारा कविता पढ़ी गई और समुदाय से उमरी नेत्री द्वारा कोविड-19 संकट काल में हुई शादियों का लड़कियों के जीवन पर पड़े प्रभाव का अनुभव साझा किया गया। इस दौरान विकास कार्यक्रम से जुड़ी लड़कियों द्वारा कार्टून पोस्टर भी पेश किये गये।

   

कार्यक्रम में खेल खेल में नजरिया बदलो कार्यक्रम के तहत महिलाओं और लड़कियों के साथ रुचिकर खेल खिलाए गए। खेल नेतृत्व विकास कार्यक्रम से जुड़ी लड़कियों ने स्वयं तैयार किये जिसके जरिए उन्होंने कोविड-19 में महिलाओं से जुड़े मुद्दों को संबोधित किया। खेल कुछ इस प्रकार के रहे जैसे तस्वीर का तसव्वुर, गोलमाल, हम आपके हैं कौन, पूंछ लगाओ जीनियस कहलाओं, कुर्सी दौड़, हमसे हो तुम हमें पहचानों, जो जीता वही सिकंदर, हमसे है जमाना, सेहत का राज, ज़िंदगी से रूबरू, तोलमोल, कुबुल हैं?, इसके अलावा कुर्सी दौड़, जो वादा किया वह निभाना पड़ेगा।

कार्यक्रम के दौरान गोमती नगर से आई हिंदुजा वर्मा ने कहा कि महिला दिवस में महिलाओं के साथ साथ पुरुषों की भी सहभागिता होनी चाहिए, जिससे वे अपने घर की महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर सकें। आर्शी ने कहा कि लड़कियों की हिम्मत ताकत उनकी पहचान है। जो उनकी जिंदगी में नया बदलाव लाती है। यासमीन ने कहा कि कोरोना वायरस में जब लड़कियों की नौकरी छूट गई तो शादी ही उनकी जिंदगी का विकल्प बनकर रह गई। वरीशा ने कहा कि घरों में लड़कियों को एक प्रॉपर्टी की तरह देखा गया। जिसके तहत लड़कियों की काबिलियत को महत्व नहीं दिया गया। शाहीन ने बताया कि कोविड-19 में दबी आवाज में दहेज का लेनदेन हुआ। जिनके मां बाप नहीं दे पाए उनकी लड़की को ससुराल में परेशान किया गया। कंचन ने बताया कि पसंद की शादी में भी कई लड़कियों को ससुराल पक्ष से अनेकों पाबंदियां झेलनी पड़ी, क्योंकि शादी में तो इंसान के साथ साथ पूरे परिवार के सदस्यों से रिश्ता जुड़ता है। वर्मा ने कहा कि लड़कियों की हर गतिविधियों पर पाबंदी लगाई जाती है कि यह ना करो ना करो और जो भी करना है। अपने ससुराल जाकर करना, लेकिन ससुराल में बहू को खाने में बंद कर दिया जाता है और उसकी ख्वाहिशों का गला घोटा जाता है। एक अवसर की तरह देखा गया जिसमें लड़कियों की शादी के लिए दबाव डाला गया। उनकी पढ़ाई छोड़ दी के घर के कामों में डाल दिया।

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