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औलाद को भाया संपत्ति का लालच, वृद्धाश्रम में बुज़ुर्गों का इलाज करके डॉक्टरों ने निभाया फर्ज़

अलीगढ़ वृद्ध आश्रम में गुमनामी की जिंदगी जी रहे बुजुर्ग, लंबे समय से थे बीमार, डॉक्टरों ने बुजुर्गों का इलाज कर निभाया फर्ज

अलीगढ़। सफेद कोट वालों ने अपना फर्ज अदा किया, जब अपनों ने दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर किया, ना कोई घर था और ना ही रहने के लिये कोई ठिकाना था, खाली सड़क और सिर के ऊपर खुला आसमान था। तो बचपन की आंखों की रोशनी भी बुढ़ापे के साथ कम हो गई थी। और ना ही कोई रास्ता था और ना ही इस रास्ते की कोई मंजिल थी। हाथों में बस कुछ था तो वो थी बस बुढ़ापे में साथ देने वाली एक लाठी। बस यही इन बुजुर्गों का एक अपना बुढ़ापे का सहारा था। मतलबी दुनिया हो चुकी थी और मतलबी लोग हो चुके थे। अपनी ही औलाद ने जब ठोकर मार कर घर से निकाल दिया। तो उन बुजुर्गों ने वृद्ध आश्रम में अपनों से दूर आकर वृद्धाश्रम को अपना ठिकाना बना लिया। जो बुजुर्ग आज अपनों के होते हुए भी अपनों से दूर एक दूसरे को कभी ना जानने वालों के बीच एक दूसरे के साथ मिलकर आज एक गुमनामी की जिंदगी जीने को मजबूर है।

दरअसल अलीगढ़ के बन्नादेवी इलाके के सांरसोंल क्षेत्र में सियाराम वृद्ध आश्रम है। इस वृद्ध आश्रम के अंदर काफी समय से रह रहे बुजुर्ग गंभीर बीमारियों से जूझते हुए पीड़ा और अपना दर्द सहन करते हुए आ रहे थे। स्थानीय लोगों द्वारा जब जीवन ज्योति अस्पताल के डॉक्टरों को इन बुजुर्गों के बारे में बताया गया। तो इसके बाद जीवन ज्योति अस्पताल के डॉक्टरों की एक टीम सियाराम वृद्ध आश्रम पहुंची और उस आश्रम के अंदर वृद्ध लोगों का इलाज करने के लिए कैंप लगाया गया। इस दौरान वृद्ध आश्रम के अंदर गंभीर बीमारियों से जूझ रहे बुजुर्गों का डॉक्टरों की टीम द्वारा उपचार कर जांच करते हुए इलाज किया गया।

कुछ लोगों के द्वारा बताया गया कि वृद्ध आश्रम में रह रहे लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो रही हैं। जहां डॉक्टरों ने इस बात को सुनने के बाद अपना दायित्व समझते हुए देखभाल करने का संकल्प लिया और साथ ही कहा कि अगर किसी घर के अंदर कोई बुजुर्ग पीड़ित है तो वह घर कभी खुशी नहीं हो सकता इसी तरह से शहर में या कहीं पीड़ित है तो हम लोग इसकी कल्पना भी नहीं कर सकते कि वह शहर कभी खुशी रह सकता है। आखिर हम भी उनके बेटे हैं चाहे भले ही उनकी कोख से जन्म ना लिया हो।लेकिन यह हमारा सामाजिक दयित्व है कि हम उनके कष्टों को दूर करें। डॉक्टर होने का फर्ज अदा करने के लिए पूरी टीम के साथ वृद्ध आश्रम पहुंचे और पूरी टीम के सहयोग से वृद्ध आश्रम में रह रहे बुजुर्गों का इलाज करने के लिए कैंप लगाया गया। जिसमे एक बुजुर्ग महिला को कान से सुनियी नही दे रहा तो उनको सुनाई देने के लिए कान के अन्दर मशीन लगाई गई। इस दौरान करीब 100 लोगों से ज्यादा वृद्ध आश्रम में रहने वाले बुजुर्गों का इलाज किया गया।

वृद्ध आश्रम में रह रहे बुजुर्गों का इलाज करने पहुंचे जीवन ज्योति अस्पताल के डॉक्टर रवि गौतम ने बताया कि सियाराम वृद्ध आश्रम में आज डॉक्टरों की टीम पहुची और वृद्ध आश्रम में रह रहे बुजुर्ग अवस्था में पहुंच चुके लोग एक लंबे समय से गंभीर बीमारियों और पीड़ा से गुजर रहे थे। बुजुर्गों का इलाज करने के लिए डॉ हेमंत के नेतृत्व में एक टीम उपचार करने के साथ-साथ जांच करने के लिए पहुंचे थे। सभी बुजुर्गों की डॉक्टरों ने जांच करते हुए गंभीर बीमारियों से जूझ रहे बुजुर्ग लोगों का इलाज किया। इस दौरान बुजुर्गों को सेवा देने के बाद डॉक्टरों को इलाज के दौरान महसूस हुआ कि अपने मां-बाप साथ रहकर उनकी सेवा कर रहे हैं। इस दौरान इलाज का कोई पैसा वृद्ध आश्रम में रहने वाले बुजुर्गों से नहीं लिया जाता सबका फ्री में इलाज किया जाता है।

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