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जन्मदिन विशेष : अजय बिष्ट से योगी आदित्यनाथ बनने तक का सियासी सफर

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आज 49वां जन्मदिवस है. योगी आदित्यनाथ किसी समय में उत्तराखंड के निवासी अजय सिंह बिष्ट हुआ करते थे। इनका जन्म 5 जून 1972 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले स्थित यमकेश्वर तहसील के पंचुर गांव में हुआ। इनके पिता का नाम आनन्‍द सिंह बिष्‍ट और माता का नाम सावित्री देवी है. योगी कुल सात-भाई बहन हैं. योगी आदित्यनाथ अपने माता-पिता के पांचवें संतान हैं. गढ़वाल विश्‍वविद्यालय से गणित से बीएससी करने वाले योगी आदित्यनाथ साल 1993 में गणित में एमएससी की पढ़ाई के दौरान गोरखपुर पहुंचे. 15 फरवरी 1994 को गोरखनाथ मंदिर के महंत अवैद्यनाथ से दीक्षा लेकर घर को छोड़ दिया और योगी आदित्यनाथ बन गए थे।

सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रवादी समूहों के संस्थापक हैं योगी आदित्यनाथ

योगी हिंदू युवा वाहिनी संगठन के संस्थापक भी हैं, जो कि हिंदू युवाओं का सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रवादी समूह है। नाथ सम्प्रदाय के अगुवा, गोरक्षपीठ के महंत योगी आदित्यनाथ ने लगातार पांच बार सांसद भी रह चुके हैं. इसी दौर में योगी आदित्यनाथा ने हिन्दू युवा वाहिनी और बजरंग दल जैसे संगठनों को मजबूती दी. योगी आदित्यनाथ ने हिन्दुत्व का झंडा बुलंद किया.

1998 महंत अवैद्यनाथ ने योगी ने घोषित किया था अपना उत्तराधिकारी

साल 1998 में महंत अवैद्यनाथ ने योगी आदित्यनाथ को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया. इसके अलावा उन्होंने योगी आदित्यनाथ को लोकसभा प्रत्याशी भी घोषित कर दिया. जिसके बाद हुए चुनाव में वह मात्र 26 साल की ही उम्र में जीतकर हासिल कर संसद भवन पहुंचे. पहले ही चुनाव में जीत दर्ज करने वाले योगी आदित्यनाथ को सबसे कम उम्र में सांसद बनने का गौरव हासिल हुआ.

बगावती तेवर के बावजूद बीजेपी को बनाना पड़ा सीएम

साल 2007 के विधानसभा चुनाव और 2009 के लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने बगावती तेवर भी दिखाए. योगी आदित्यनाथ ने साल 1998, 99, 2004, 2009 और 2014 के लोकसभा चुनाव में लगातार पांचवी जीत हासिल की. साल 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी को मिली जीत के बाद उन्हें मुख्यमंत्री चुना गया और 19 मार्च 2017 को उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री पद की शपथ ली.

“लड़ के ली थी मुख्यमंत्री की कुर्सी”

योगी आदित्यनाथ ने ख़ुद की राजनीति में भी बीजेपी के भरोसे कभी नहीं रहे, वो न तो आरएसएस में कभी रहे और न ही बीजेपी संगठन में कभी रहे, लेकिन आक्रामक हिन्दूवादी नेता के तौर पर वो आरएसएस और बीजेपी दोनों को भाते थे. उनके पास हिन्दू युवा वाहिनी के तौर पर एक समानांतर संगठन भी था. “साल 2007 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने बीजेपी से इस्तीफ़ा देने की भी धमकी दे दी थी. यहां तक कि साल 2017 में एक तरह से उन्होंने लड़कर मुख्यमंत्री की कुर्सी ली थी. लेकिन सच यह भी है कि साल 2017 में मोदी का चेहरा देखकर यूपी के लोगों ने वोट दिया था, योगी का नहीं. “बीजेपी ने साल 2017 का चुनाव योगी को मुख्यमंत्री के रूप में पेश करके भले ही न लड़ा हो लेकिन यह भी सही है कि उसके बाद उन्होंने अपनी एक अलग पहचान ख़ुद बनाई है.

बीजेपी के पास योगी आदित्यनाथ का नहीं है कोई विकल्प

वजह और स्थितियां चाहे जो हों, यूपी बीजेपी में योगी आदित्यनाथ की टक्कर का दूसरा लीडर नहीं दिखाई देता है, जिस तरह की आक्रामक शैली वाले नेता की दरकार पार्टी को है, उस रूप में शायद उनका विकल्प पार्टी के पास नहीं है. पर हां, यह कहना भी अतिशयोक्ति होगी कि बीजेपी में विकल्पहीनता की स्थिति है. यह ज़रूर है कि जिन मापदंडों पर पार्टी को नेतृत्व की ज़रूरत है, योगी आदित्यनाथ उस पर सबसे ज़्यादा खरे उतर रहे हैं.

मोदी-शाह को सीधे चुनौती दे रहे हैं योगी आदित्यनाथ

सरकार और संगठन में बदलाव की संभावनाओं के बीच दोनों स्तरों पर नेतृत्व परिवर्तन तक की चर्चा ज़ोर-शोर से हो रही है. हालांकि जानकारों को इसके बावजूद किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं दिख रही है.इन सबके बीच यूपी की राजनीति में एक महत्वपूर्ण नाम फिर चर्चा में आ गया है जिसे चार महीने पहले यूपी की राजनीति में उतारा गया था. उनके ज़रिए बड़े बदलाव की संभावना भी जताई गई थी. यह नाम है पूर्व नौकरशाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बेहद क़रीबी माने जाने वाले अरविंद कुमार शर्मा का. शर्मा की इंट्री का मक़सद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रभाव को कम करना या फिर उनकी कथित मनमानीपूर्ण कार्यशैली पर रोक लगाना है. लेकिन चार महीने बीत जाने के बावजूद अरविंद शर्मा को न तो मंत्रिपरिषद में जगह दी गई और न ही कोई अन्य महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी. जिसकी वजह से यह माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनौती दे रहे हैं। साथ ही सीएम योगी मौका मिलते ही यह भी जता देते हैं कि नरेंद्र मोदी के बाद बीजेपी में प्रधानमंत्री के विकल्प वो ही हैं.

योगी आदित्यनाथ की ये फोटो खूब हुईं वायरल

थाइलैंड के एक पार्क में टाइगर के बच्चे को दूध पिलाते हुए योगी की तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थी। साथ ही गोरखपुर में अपने ऑफिस में बंदर के साथ बैठकर काम करते वक्त आदित्यनाथ की फोटो किसी ने खींच ली, जो चर्चा का विषय बनी।

‘विवादों से हुआ सामना,जेल भी जाना पड़ा’

समय के साथ योगी आदित्यनाथ की ख्याति भी बढ़ती चली गई. मुख्यमंत्री बनने से पहले उनका विवादों के साथ चोली दामन का साथ रहा है. 10 फरवरी, 1999 में महाराजगंज जिले के थाना कोतवाली स्थित पचरुखिया कांड ने योगी को और चर्चा में ला दिया था. इसी कांड के बाद से उनके ऊपर कई बार एक धर्म के विरोधी और सांम्प्रदायिक भाषण देने का आरोप लगा. गोरखपुर में हुए संप्रदायिक दंगों के दौरान उन्हें जेल भी जाना पड़ा.

राष्ट्रपति व पीएम मोदी सहित बड़े नेताओं ने दी जन्मदिन की बधाई

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह व गृहमंत्री अमित शाह सहित कई बड़े नेताओं ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को उनके जन्मदिन पर बधाई दी है। राष्ट्रपति कोविंद व उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने सीएम योगी से फोन पर बात की और उन्हें बधाई दी। यह मुख्यमंत्री योगी का 50वां जन्मदिन है। हालांकि, अपने जन्मदिन पर मुख्यमंत्री कोई आयोजन नहीं करते। योगी होने के नाते वो अपना जन्मदिन मनाते भी नहीं हैं।

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट कर कहा कि उत्तर प्रदेश के अत्यंत कर्मठ और लोकप्रिय मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। प्रदेश के विकास और जन कल्याण के लिए वे समर्पित भाव से काम कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में उ. प्र. उत्तरोत्तर प्रगति करे यही कामना है। ईश्वर उन्हें स्वस्थ रखें और दीर्घायु करें। वहीं, प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने ट्वीट कर मुख्यमंत्री योगी को बधाई दी। उन्होंने ट्वीट किया कि ओजस्वी वक्ता व कर्मठ व्यक्तित्व के धनी एवं उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी, आपको जन्मदिन की अनंत शुभकामनाएं। प्रभु श्रीराम जी से प्रार्थना है कि आप दीर्घायु हों और सदैव स्वस्थ एवं प्रसन्न रहें।

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