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अपनी ‘गर्दन’ बचाने के लिए एलडीए अभियंता ने चली अब ये ‘चाल’

बिल्डरों पर बना रहा है ‘कंपाउंडिंग’ कराने का दबाव
‘कंपाउंडिंग की आड़ में अवैध निर्माणों पर लगेगी ‘वैध’ की ‘मुहर’

लखनऊ ।लखनऊ विकास प्राधिकरण जोन 6 क़ैसरबाग़ और अमीनाबाद में तैनात अवर अभियंता इस्माइल खान द्वारा मोटी रकम लेकर कराये गए अवैध निर्माणों की खबर प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद प्राधिकरण के इस भ्रष्ट अभियंता ने चिन्हित की गई अवैध इमारतों और अपनी ‘गर्दन’ को बचाने के लिए ‘कंपाउंडिंग’ का ‘खेल’ शुरू कर दिया है।अब सवाल यह उठता है कि इस बार कंपाउंडिंग नियमों के मुताबिक होगी या फिर वैसे ही जैसे हमेशा होती रही है।

‘कंपाउंडिंग के खेल ने किया शहर का ‘सत्यानाश’

दरअसल एलडीए के ‘कंपाउंडिंग’ के खेल में पूरे शहर का सत्यानाश हो चुका है। अवैध निर्माण होते वक्त आंख मूंद लेना और फिर नियमों को तोड़मरोड़कर उनकी कंपाउंडिंग कराकर उन पर वैध होने की मुहर लगा देना एलडीए अभियंताओं की पुरानी फितरत है। इस खेल में एलडीए के अभियंताओं सहित स्टाफ पर तो जमकर नोट बरसते हैं लेकिन शहर में समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं।

अभियंता ने बिल्डरों पर बनाना शुरू किया दबाव

शहर में बने अवैध अपार्टमेंट, शॉपिंग काम्प्लेक्स, नर्सिंग होम, बरातघर, शॉपिंग मॉल, मल्टीस्टोरी कामर्शियल बिल्डिंग जैसी तमाम इमारतों में ज्यादातर में एलडीए के नियमों का पालन नहीं हुआ है। क़ैसरबाग और अमीनाबाद में अधिकतर निर्माण ऐसे हैं जो नक्शे के विपरीत बनाये गए हैं, और अवैध हैं, ‘एलएनवी इंडिया‘ ने जब प्राधिकरण के भ्रष्ट अभियंता की पोल खोलना शुरू की तो इस अभियंता ने अपने आपको बचाने के लिए बिल्डरों पर ‘कंपाउंडिंग’ कराने का दबाव बनाना शुरू कर दिया, एक बिल्डर ने बताया कि एलडीए इंजीनियर इस्माइल खान ने पहले तो मोटी रकम लेकर ‘बेधड़क’ निर्माण करने को कहा, अब बिल्डिंग बनकर लगभग तैयार है तो बिल्डिंग को ‘सील’ करवाने या फिर ‘कंपाउंडिंग’ करवाने के लिए दबाव बना रहा है. बिल्डर ने कहा कि अगर निर्माण अवैध था तो पहले ही क्यों कार्रवाई नहीं की ? अबतक हर महीने इतनी मोटी रकम क्यों वसूलता रहा ? ‘कंपाउंडिंग ही करानी थी तो पहले बताना चाहिए था ?

अमीनाबाद और क़ैसरबाग़ में है कई दर्जन अवैध निर्माण

इसी तरह अमीनाबाद, कैसरबाग, मॉडल हाउस, नया गांव, जम्बूर्खाणा, घसियारी मंडी, लालबाग़, खंदारी बाजार, डॉक्टर सूजा रोड पर दर्जनों निर्माण है, जोकि बिना नक्शे मंजूर कराए या नक़्शे के विपरीत बने हैं, जोन 6 क़ैसरबाग और अमीनाबाद में कई दर्जन अपार्टमेंट और कामर्शियल बिल्डिंग अवैध तरीके से बनकर खड़ी हैं। इनमें से बहुत सी बिल्डिंगों की कंपाउंडिंग हो ही नहीं सकती, मगर वह भी एलडीए इंजीनियरों की देखरेख में कंपाउंडिंग प्रक्रिया तक पहुंच गई।

क्या हैं कंपाउंडिंग के नियम

1- अगर कोई भवन मालिक आवासीय एरिया में आवासीय नक्शा मंजूर कराकर उसमें कामर्शियल गतिविधियां जैसे ग्रुप हाउसिंग, अपार्टमेंट, शॉपिंग काम्प्लेक्स, नर्सिंग होम, बरातघर, दुकान, ऑफिस आदि चला रहा है तो व्यवसायिक गतिविधियों में चलने वाले हिस्से (अधिकतम 30 फीसदी) को कामर्शियल में निर्धारित समन शुल्क जमाकर कंपाउंड किया जा सकता है। बशर्ते इस भवन के आगे की रोड की चौड़ाई 24 फुट हो।

2- अगर किसी ने अपने भवन का नक्शा कामर्शियल मंजूर कराया है लेकिन निर्माण स्वीकृत नक्शे के विपरीत अधिक करा लिया है। बिल्डिंग के आगे पीछे सेट बैक फ्रंट बैक नहीं छोड़ा है तो उस भवन की निर्धारित शमन शुल्क जमा कर कंपाउंडिंग होगी। कंपाउंडिंग में अधिक बनी बिल्डिंग को तोड़कर सेट बैक और फ्रंट बैक छोड़ना अनिवार्य होगा।

3- इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज या अन्य बड़े व्यवसायिक भवनों के नक्शे स्वीकृत करने से पहले एलडीए बोर्ड उस पर विचार करेगा। इन शिक्षण संस्थानों को अपनी जमीन का लैंडयूज बदलवाना पड़ेगा। अगर बिना लैंडयूज बदले बिल्डिंग बनी है तो उसको भी निर्धारित शमन शुल्क लेकर कंपाउंड कराने का प्रावधान है। मगर, इनका शमन शुल्क इतना अधिक होता है कि अधिकांश व्यवसायी आधी-अधूरी कंपाउंडिंग कराते हैं।

4- आवासीय कंपाउंडिंग में जमीन की लागत का 6.25 प्रतिशत और व्यवसायिक कंपाउंडिंग में 12 प्रतिशत शुल्क जमा करने का प्रावधान है। शासन से शमन शुल्क जमा करने के संबंध में नियम बदलते भी रहते हैं।

5- अगर किसी भवन मालिक ने फ्रंट और सेट बैक नहीं छोड़ा है तो उस बिल्डिंग का 25 प्रतिशत हिस्सा ही कंपाउंड हो सकता है। इसमें सर्किल रेट की दो गुनी कीमत तक का शमन शुल्क जमा करना पड़ सकता है।

ऐसे होता है कंपाउंडिंग का खेल

लखनऊ विकास प्राधिकरण के अभियंता की मानें तो एलडीए में जब किसी आवासीय या कामर्शियल बिल्डिंग की कंपाउंडिंग की जाती है तो उसमें एलडीए का स्टाफ अतिरिक्त फायदा लेकर अवैध बिल्डिंग में 25 प्रतिशत हिस्से की कंपाउंडिंग करता है। भवन मालिक से 75 फीसदी हिस्सा तोड़ने का शपथ पत्र लिया जाता है, जिसमें लिखा होता है- ‘टू बी डिस्मेंटल’। इस खेल में प्राधिकरण के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, माली, सुपरवाइजर और जेई से लेकर ऊपर तक अफसर शामिल होते हैं। तभी अवैध बिल्डिंग की कंपाउंडिंग संभव होती है, जबकि प्राधिकरण नियमानुसार अवैध भवन के 75 फीसदी हिस्से को तोड़ना जरूरी है। इस हिस्से के टूटने की वीडियो और फोटोग्राफी कराकर बीडीए टीम निरीक्षण करे। उसकी रिपोर्ट मिलने के बाद ही कंपाउंडिंग होनी चाहिए।

वीसी और सचिव का ‘चहेता’ है भ्रष्ट अभियंता

अवैध निर्माणों से शहर का सत्यानाश करने वाला अभियंता इस्माइल खान प्राधिकरण उपाध्यक्ष शिवाकांत द्विवेदी और सचिव मंगला प्रसाद का काफी करीबी है, यही वजह से सैकड़ों की तादाद में अवैध निर्माण की जानकारी होने के बावजूद अभी तक इस अभियंता के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई, एलडीए सूत्रों की मानें तो ऐसा तभी संभव है जब अवैध काली कमाई का का हिस्सा ‘आला कमान’ तक सीधे और ‘ईमानदारी’ से पहुंचाया जा रहा हो। यही वजह है अबतक न तो अधिशासी अभियंता जहीरुद्दीन के खिलाफ़ कोई कार्रवाई हुई न ही अवर अभियंता इस्माइल खान के खिलाफ ही कोई एक्शन लिया गया, हद तो यह है कि अवैध निर्माणों के खिलाफ भी कोई कार्रवाई नहीं हुई, सभी निर्माण धड़ल्ले से चल रहे हैं।

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