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श्रमिक वर्ग पर पड़ा कोरोना कहर, हो रहे हैं लगातार हादसों का शिकार

फाइल फोटो

कोरोना वायरस ने जहां एक ओर पूरी दुनिया को हिला के रख दिया है तो वहीं इस कोरोना संक्रमण काल का यदि सबसे बुरा किसी पर असर पड़ा है तो वह श्रमिक वर्ग है. जहां श्रमिक वर्ग का एक ओर रोजगार छीना तो वहीं अपने घर वापसी में कई मजदूरों को अपनी जान भी गंवानी पड़ी। इसे विडंबना ही कहिये जीवन में सबसे अधिक संघर्ष करने वाले वर्ग को सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा है. कोरोनावायरस पर काबू पाने के लिए देशभर में लगाए गए लॉकडाउन के बीच प्रवासी मजदूर अपने घरों को लौटने के लिए मजबूर हैं. सार्वजनिक परिवहन बंद होने की वजह से मजदूर पैदल ही अपने घरों की ओर जाने के लिए मजबूर हैं. ऐसे में मजदूर अपने घर जाते हुए रास्ते में हादसों का भी शिकार हो रहे हैं. ताजा सामाचार उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से आया. जहां दर्जनभर से ज्यादा मजदूरों की मौत सड़क हादसे में हो गई. उत्तर प्रदेश में रोडवेज की एक बस पैदल बिहार जा रहे 6 मजदूरों को कुचल दिया. वहीं, मध्य प्रदेश के गुना में एक बस और ट्रक में भिड़त से आठ मजूदरों की मौत हो गई.
उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फ़रनगर में पैदल जा रहे 6 प्रवासी मजदूरों को यूपी रोडवेज की बस ने कुचल दिया है. इसमें दो लोग घायल बताए जा रहे हैं. कहा जा रहा है कि ये प्रवासी मजदूर पंजाब से अपने घर बिहार के गोपालगंज लौट रहे थे. यह हादसा ऐसे समय में हुआ है जब बुधवार को उत्तर प्रदेश सरकार ने आधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि “किसी भी कीमत” पर कोई प्रवासी मजदूर पैदल नहीं जाए. हाल ही में पैदल जा रहे मजदूरों की दुर्घटना के कई मामले सामने आए हैं.

वहीं, मध्य प्रदेश के गुना में अपने घर जा रहे 8 प्रवासी मजदूर सड़क हादसे का शिकार हो गए और 54 लोग घायल हैं. ये मजदूर महाराष्ट्र से उत्तर प्रदेश जा रहे थे. तभी हाइवे एक ट्रक और बस में भिड़त हो गई. हादसे में 8 मजदूरों की जान चली गई. इस हादसे में बस में सवार 40 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए. हादसे के बाद मौके पर पुलिस और प्रशासन की टीम पहुंच गई है. राहत एवं बचाव कार्य जारी है. घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज किया जा रहा है..

अब ऐसे में जिस वर्ग के लिए सरकार इतनी योजनाओं के दावे कर रही है. और उनके घर वापसी से लेकर रोजगार तक के प्रबंध करने की बात कह रही है तो ऐसे में मजदूरों का इस तरह हादसों का शिकार होना। सरकार की कथनी और करनी पर सवाल खड़ा कर रहा है

 

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