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CORONA VACCINE को लेकर लखनऊ के इन अस्पतालों में शुरू हुआ ड्राई रन

कोविड 19 के वैक्सिनेशन की व्यवस्थाओं का निरीक्षण करते जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश

लखनऊ। देशभर में आज से कोरोना वैक्सीन का ड्राई रन शुरू किया गया। यह ड्राई रन देश के हर राज्य में दो-दो शहरों में आयोजित किया गया। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी ड्राई रन का आयोजन केजीएमयू से किया गया। स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह ने बताया कि कोरोना वैक्सीन को लेकर ड्राई रन में पीजीआई, केजीएमयू, लोहिया, सहारा और दो सीएचसी जिनमे माल और मलिहाबाद शामिल रहे। इन जगहों पर प्रशिक्षित किये गए वेक्सीनेटर की प्रक्रिया को देखने के लिए एक रिहर्सल किया गया जिसको ड्राई रन करते हैं। इसके माध्यम से वैक्सीन निकालने से लेकर इंजेक्शन लगाने तक, बॉयोमेडिला तरीके से उसका कैसे डिस्पोजल करते हैं और ऑब्जर्वेशन कमरे में रखने से क्या क्या रिएक्शन आ सकते हैं

और क्या क्या दवाई दी जा सकती है। ये पूरी ट्रेनिंग दी गई है इसको लेकर ड्राई रन किया गया है कि प्रशिक्षण पाए लोग प्रशिक्षित हो गए हैं कि नहीं। मंत्री ने बताया कि इस ड्राई रन के दौरान कोई वैक्‍सीन इस्‍तेमाल नहीं की गई। ड्राई रन के जरिए यह टेस्‍ट किया गया कि सरकार ने टीकाकरण का जो प्‍लान बनाया है, वह असल में कितना मुफीद है। इसके अलावा सरकार ने Co-WIN ऐप के जरिए रियल-टाइम मॉनिटरिंग को भी टेस्‍ट किया। लखनऊ में सहारा अस्पताल, आरएमएल अस्पताल, केजीएमयू और एसजीपीजीआई सहित 6 केंद्रों का चयन किया है। इन केंद्रों पर सुबह 9 बजे से लेकर 4 बजे तक वैक्सीनेशन की तैयारियों को परखा गया।

कोविड वैक्सीनेशन का ड्राई रन क्यों ?

पूरी कवायद इसलिए की जा रही है ताकि फाइनल अभियान लॉन्‍च करने से पहले उसकी खामियों को दूर किया जा सके। इसके अलावा अभियान में शामिल प्रोग्राम मैनेजर्स को हैंड्सऑन अनुभव भी मिलेगा। दरअसल, रिहर्सल से कोविड-19 टीके को जुटाने और टीकाकरण की जांच प्रक्रिया, क्षेत्र में कोविन के उपयोग, नियोजन, क्रियान्वयन, रिेपोर्टिंग के बीच तालमेल, चुनौतियों की पहचान, वास्तविक क्रियान्वयन के बारे मे मार्गदर्शन, यदि किसी सुधार की जरुरत हो तो उसे चिह्नित करना, आदि का पता चलेगा।

क्‍या होता है ड्राई रन?

ड्राई रन का मतलब ये है कि पूरे टीकाकरण प्रोसेस की मॉक ड्रिल होगी। यानी सबकुछ वैसा ही होगा जैसा टीकाकरण अभियान में होने वाला है, सिवाय वैक्‍सीन एडमिनिस्‍ट्रेशन के। मतलब ये कि डमी वैक्‍सीन कोल्‍ड स्‍टोरेज से निकलकर वैक्‍सीनेशन सेंटर तक पहुंचेगी। साइट्स पर क्राउड मैनेजमेंट को भी टेस्‍ट किया जाएगा। वैक्‍सीन की रियल-टाइम मॉनिटरिंग को भी परखा जाएगा। कुल मिलाकर असली वैक्‍सीन देने को छोड़कर बाकी हर एक चीज होगी।

 

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