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अलविदा मिल्खा सिंह: एशिया में चलता था सिक्का, कम उम्र में बनाये थे कई रिकॉर्ड

भारतीय खेल का जब भी जिक्र होगा मिल्खा सिंह का नाम सबसे ऊपर की लिस्ट में लिखा जाएगा। वह देश के पहले ट्रैंक ऐंड फील्ड सुपर स्टार थे। उन्हें फ्लाइंग सिंह के नाम से भी जाना जाता था| फ्लाइंग सिंह कहे जाने वाले महान धावक मिल्खा सिंह के निधन के बाद पूरा देश दुखी है। बीती रात चंडीगढ़ के पीजीआई अस्पातल में उन्होंने आखिरी सांस ली। बता दें कि इसी हफ्ते उनकी पत्नी ने भी कोरोना से लड़ाई में दम तोड़ दिया था। अब मिल्खा सिंह के निधन पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गृहमंत्री अमित शाह सहित सहित दिगग्ज नेताओं ने दुख जताया।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने ट्वीट करते हुए लिखा,’ ‘स्पोर्टिंग आइकन मिल्खा सिंह के निधन से मेरा दिल दुख से भर गया है, उनके संघर्षों की कहानी उनके चरित्र की ताकत भारतीयों की पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी, उनके परिवार के सदस्यों और अनगिनत प्रशंसकों के प्रति मेरी गहरी संवेदना है।

वहीं पीएम मोदी ने ट्वीट करते हुए महान धावक मिल्खा सिंह के निधन दुख प्रकट किया है। उन्होंने कहा कि मिल्खा सिंह जी के निधन से हमने एक महान खिलाड़ी खो दिया। जिन्होंने देश की कल्पना पर कब्जा कर लिया, जो अनगिनत भारतीयों के दिलों में एक विशेष स्थान रखते थे। उनके प्रेरक व्यक्तित्व ने उन्हें लाखों लोगों का प्रिय बना दिया। उनके निधन से आहत हूं। गृहमंत्री अमित शाह ने भी मिल्खा सिंह के निधन पर दुख जताया है। ट्वीट करते हुए उन्होंने लिखा,’फ्लाइंग सिख, महान धावक मिल्खा सिंह जी के दुखद देहांत पर देश शोक मना रहा है। वे विश्व एथलेटिक्स पर एक अमिट छाप छोड़ गए हैं। देश उन्हें भारतीय खेलों के सबसे चमकीले तारों में से एक के रूप में हमेशा याद रखेगा।

एशियन गेम्स में बनाया था नैशनल रिकॉर्ड

मिल्खा की पहचान एक ऐसे ऐथलीट के रूप में थी जो बेहद जुनूनी और समर्पित ऐथलीट थे। 1958 के तोक्यो एशियन गेम्स में उन्होंने 200 मीटर और 400 मीटर में गोल्ड मेडल हासिल किया। मेलबर्न ओलिंपिक में मिल्खा फाइनल इवेंट के लिए क्वॉलिफाइ नहीं कर पाए थे। लेकिन उनमें आगे बढ़ने की तलब थी। उन्होंने अमेरिका के चार्ल्स जेनकिंस से बात की। जेनकिंस 400 मीटर और 4×400 मीटर रिले के गोल्ड मेडलिस्ट थे। उन्होंने जेनकिंस से पूछा कि वह कैसे ट्रेनिंग करते हैं। उनका रूटीन क्या है। जेनकिंस ने बड़ा दिल दिखाते हुए मिल्खा के साथ सारी बातें साझा कीं।

मिल्खा की उम्र तब 27 साल थी। अगले दो साल वह बड़ी शिद्दत के साथ जेनकिंस के रूटीन पर चले। इसका फायदा भी हुआ। मिल्खा ने 1958 के एशियन गेम्स में नैशनल रेकॉर्ड बनाया। मिल्खा सिंह को 400 मीटर की दौड़ बहुत भाती थी। यहां उन्होंने 47 सेकंड में गोल्ड मेडल हासिल किया। सिल्वर मेडल जीतने वाले पाब्लो सोमब्लिंगो से करीब दो सेकंड कम वक्त लिया था मिल्खा सिंह ने।

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