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आज से हिन्दू नववर्ष 2077 का हुआ आरंभ, गुड़ी पड़वा के सा​थ चैत्र नवरात्रि भी प्रारंभ

फाइल फोटो-

हिन्दू कैलेंडर के आज चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि है। अमावस्या के बाद शुक्ल पक्ष की शुरूआत होती है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा यानी पहली ति​थि से हिन्दू नववर्ष 2077 का प्रारंभ हो गया है। इसे नव संवत्सर 2077 भी कहते हैं। आज ही कलश स्थापना के साथ चैत्र नवरात्रि का भी शुभारंभ हो गया है। इस नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरुपों की विधि विधान से पूजा अर्चना की जा रही है। आइए जानते हैं कि इस सप्ताह में कौन कौन से व्रत एवं त्योहार आने वाले हैं और वे किस दिन पड़ेंगे.

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चैत्र नवरात्रि प्रारंभ : आज चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से चैत्र नवरात्रि का आरंभ हो चुका है। आज विधि विधान से शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना होगा और मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की अराधना की जाएगी।

हिन्दू नववर्ष 2077: चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से ही हिन्दू नववर्ष का प्रारंभ होता है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से विक्रम संवत 2077 यानी हिन्दू नववर्ष 2077 का प्रारंभ हो गया है। इसे नव संवत्सर 2077 के नाम से भी जाना जाता है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार ही सभी व्रत एवं त्योहार आते हैं। सम्राट विक्रमादित्य के प्रयास से ही विक्रम संवत का प्रारंभ हुआ था।

गुड़ी पड़वा 2020: गुड़ी पड़वा का पर्व आज दक्षिण भारत के राज्यों में मनाया जा रहा है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को गुड़ी पड़वा के रूप में मनाते हैं। गुड़ी का अर्थ होता है विजय पताका और पड़वा का अ​र्थ होता है प्रतिपदा। इस दिन से शालिवाहन संवत या शक का शुभारंभ होता है। इसके पीछे भी एक कहानी है, जिसके अनुसार शालिवाहन नाम के कुम्हार ने मिट्टी की सेना बनाकर शत्रुओं को हराया था, उसके उपलक्ष्य में ही गुड़ी पड़वा मनाया जाने लगा।

26 मार्च: चैत्र नवरात्रि दूसरा दिन। माता ब्रह्मचारिणी की पूजा।

नवरात्रि के दूसरे दिन दुर्गा मां के दूसरे रूप ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है। उनकी पूजा से बुद्धि, अध्ययन, व्यापार, कार्यक्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है।

27 मार्च: गणगौर। चैत्र नवरात्रि तीसरा दिन। माता चंद्रघंटा की पूजा। 

नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा के तीसरे रूप चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। उनकी पूजा से बृहस्पति के दोष दूर हो जाते हैं।

28 मार्च: वैनायकी श्रीगणेश चतुर्थी व्रत। चैत्र नवरात्रि चौथा दिन। मां कुष्मांडा की पूजा।

नवरात्रि का चौथा दिन है। इस दिन मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप कूष्मांडा की पूजा होती है। उनकी पूजा से सूर्य दोष से मुक्ति, धन लाभ, आरोग्य, शक्ति और सम्मान प्राप्त होता है।

29 मार्च: श्री पंचमी। चैत्र नवरात्रि पांचवा दिन। स्कंदमाता की पूजा।

नवरात्रि के पांचवे दिन मां दुर्गा के पांचवे स्वरूप स्कंदमाता की पूजा होती है। उनकी पूजा करने से मंगल ग्रह के दोष दूर होते हैं। बल और पराक्रम प्राप्त होता है।

30 मार्च: दिन— सोमवार: सूर्य षष्ठी व्रत। चैत्र नवरात्रि छठा दिन। कात्यायनी माता की पूजा। 

नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। उनकी पूजा से काल सर्प दोष और राहु के दोष दूर होते हैं। कार्य क्षेत्र में सफलता मिलती है।

नवरात्रि का सातवां दिन/ कालरात्रि माता की पूजा

नवरात्रि को सातवें दिन कालरात्रि माता की पूजा की जाती है. उनकी पूजा से काल का नाश हो जाता है

नवरात्रि का आठवां दिन/ महागौरी माता की पूजा

नवरात्रि को आठवें दिन महागौरी माता की पूजा की जाती है. उनकी पूजा से पाप नष्ट हो जाते है

नवरात्रि का नौवां दिन/ सिद्धिदात्री माता की पूजा

नवरात्रि को नवें दिन माता सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है. उनकी पूजा से सिद्धियों की प्राप्ति होती है…. https://lnvindia.com/hindu-new-year-2…-with-gudi-padwa

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