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लखनऊ में ‘लहरा’ रही है अवैध निर्माण की ‘खेती’

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‘डील’ नहीं तो ‘सील’ का चल रहा है फार्मूला

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में जहां एक तरफ भू-माफियाओं पर नकेल कसी जा रही है। तो वहीं दूसरी तरफ रसूखदारों को संरक्षण भी दिया जा रहा है। शहर के सुनियोजित विकास में लगी अवैध निर्माण की दीमक उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम-1973 की व्यवस्था को हजम कर रही है और जिम्मेदार अधिकारी कागजी कसरत में जुटे हैं। ‘सीलिंग’ की कार्रवाई भी सिर्फ उन्ही निर्माणों पर की जाती है जहाँ ‘डीलिंग’ नहीं हो पाती है.

लखनऊ विकास प्राधिकरण के भ्रष्ट अभियंताओं के काले कारनामों में आज हम आपको जोन 6 अमीनाबाद में तैनात महाभ्रष्ट अभियंता इस्माइल खान के करतूतों का खुलासा करेंगे, आपको बताएँगे कि कैसे ये भ्रष्ट अभियंता अवैध काली कमाई के लिए अवैध निर्माणों की खेती करा रहा है, लखनऊ का व्यावसायिक इलाका है अमीनाबाद, यहाँ प्रति माह कई सौ करोड़ का कारोबार किया जाता है, यही वजह है यहाँ पर अवैध ढंग से निर्माण निर्माण कराने की होड़ मची रहती है, चूँकि यहाँ मानचित्र के विपरीत निर्माण कराया जाता है इसलिए यहाँ सबसे अधिक रेट है या यूँ कहें कोई रेट ही नहीं है, जैसे जगह वैसी रकम देनी पड़ती है.

अमीनाबाद बना अवैध कमाई का अड्डा

लखनऊ विकास प्राधिकरण जोन 6 के अंतर्गत आने वाले अमीनाबाद में अवैध निर्माण को संरक्षण देने के लिए 50 हज़ार से 1 लाख रुपये प्रतिमाह की वसूली अवर अभियंता द्वारा की जाती है, इसके अलावा प्रति स्लैब 2 लाख से 5 लाख रुपये की उगाही अलग से की जाती है, यही वजह है अवर अभियंता इस्माइल खान अमीनाबाद को छोड़ना नहीं चाहता, इस्माइल खान 3 साल से घूम फिर के अमीनाबाद, क़ैसरबाग और हज़रतगंज में ही तैनात रहता है।

‘जान’ जाती है तो जाए, एलडीए के ठेंगे से

आइये अब आपको बताते हैं अमीनाबाद में क्षेत्र में जारी कुछ अवैध निर्माणों के बारे में, सबसे पहले बात करते हैं अमीनाबाद अंतर्गत आने वाली न्यू मेडिसिन मार्किट की, न्यू मेडिसिन मार्किट में पांच – पांच फ़ीट की गलियों में 1 दर्जन से अधिक भव्य अवैध कमर्शियल काम्प्लेक्स बन कर तैयार हो गई है, जिसमें नियम कानून की इस तरह से धज्जियाँ उड़ाई गई है जैसे जंगलराज हो, इन अवैध कॉम्प्लेक्सों में न सेटबैक है, न पार्किंग, न फायर सेफ्टी का कोई प्राविधान है, अगर कभी कोई हादसा हो जाये तो ‘रेस्क्यू’ करना भी मुश्किल होगा, साथ ही सैकड़ों निर्दोषों की जान पर भी बन आएगी।
इंसानी ‘जान’ जाती है तो जाये, एलडीए के अवर अभियंताओं को ‘माल’ मिलना चाहिए, उनके लिए जान से बढ़कर ‘माल’ है, यही वजह है सारे नियम कानून, सेफ्टी सब कुछ ताख पर रख ये अभियंता अवैध निर्माण को संरक्षण देने में लगे रहते हैं।

अवैध निर्माण का ‘मॉडल’ बना मॉडल हाउस

अमीनाबाद अंतर्गत 108/154 मॉडल हाउस में खुलेआम 4 मंज़िला अवैध निर्माण जारी है, लेकिन अवर अभियंता इस्माइल खान और उनके ‘पार्टनर’ ‘जनेऊ भाई’ अधिशाषी अभियंता जहीरुद्दीन की कान पर एक जून तक नहीं रेंग रही, स्थानीय लोग कहते हैं कई बार शिकायत की, लेकिन एलडीए के ‘बेईमान’ इंजीनियर कोई कार्रवाई नहीं करते, हमारी शिकायत से उनकी वसूली ज़रूर बढ़ जाती है।

अमीनाबाद क्षेत्र में ही मॉडल हाउस इलाके में ‘सवेरा गेस्ट हाउस’ के पास भी कई अवैध निर्माण चल रहे हैं, यहाँ भी दोनों ‘जनेऊ भाइयों’ इस्माइल खान और ज़हीरुद्दीन ने कोई कार्रवाई नहीं की, इस इलाके में निर्माणकर्ता रहे एक बिल्डर से जब हमने बात की और पूछा कैसे कर लेते हो अवैध निर्माण ? इस पर बिल्डर ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया की, खुलेआम अवैध निर्माण जारी रखने के लिए अवर अभियंता इस्माइल खान को अपने हाथ से 50 हज़ार रुपये महीना देता हूँ, जब एलडीए के इंजीनियर खुद पैसा लेकर अवैध निर्माण करने की इजाज़त दे रहे हैं तो हमारी क्या गलती।

हरी मज़ार के पास जारी है निर्माण

मॉडल हाउस के हरी मज़ार के पास भी आपको ऐसा ही नज़ारा देखने को मिल जायगा, वहां भी खुलेआम अवैध निर्माण जारी है, इस इलाके में अमीनाबाद के व्यापारी अपने गोदाम के लिए ‘डबल’ बेसमेंट बनवाते हैं, साथ ही 4 से 5 मंज़िल के अपार्टमेंट भी बनाते हैं, यहाँ आपको हर तरफ अवैध अपार्टमेंट दिखाई देंगे, जिनके न तो मानचित्र स्वीकृत होते हैं और ना ही यहाँ नियमों का पालन किया जाता है।

इमामबाड़ा हुसैनिया के पास जारी है अवैध निर्माण

मॉडल हाउस में ही इमामबाड़ा हुसैनिया के सामने अवैध निर्माण जारी है, यहाँ आस पास रहने वालों ने अवैध निर्माण के खिलाफ शिकायत की, स्थानीय लोग कहते है एलडीए वीसी को शिकायती पत्र भेजा, कार्रवाई हुई, कुछ दिन तक निर्माण बंद रहा, उसके बाद फिर से अवैध निर्माण शुरू हो गया, साथ ही एलडीए इंजीनियर ने शिकायतकर्ताओं के नाम भी बिल्डर को बता दिए, जिसके बाद से लोगों ने शिकायत करना ही बंद कर दिया।

बड़ी पार्क के पास जारी है अवैध निर्माण

मॉडल हाउस की बड़ी पार्क के पास भी यही हाल है, यहाँ भी खुलेआम बेसमेंट के साथ 4 मंज़िला अवैध निर्माण जारी है, कोई कार्रवाई नहीं, कोई सीलिंग नहीं, कोई नोटिस नहीं, चूँकि ‘डीलिंग’ सही चल रही है इसलिए कार्रवाई करने का कोई सवाल ही नहीं पैदा होता है।

अधिकारीयों की सख्ती के नाम पर होती है वसूली

लखनऊ विकास प्राधिकरण में तैनात एक इंजीनियर बताते हैं कि जहाँ ‘डील’ नहीं होती वहीँ ‘सीलिंग’ की कार्रवाई की जाती हैं इससे दो फायदे होते हैं, पहला फायदा अवैध निर्माण सील कर अभियंता अपने गुडवर्क की संख्‍या बढ़ा लेता है, मीडिया में सीलिंग की खबर आने से अधिकारी भी खुश हो जाते हैं, और दूसरा फायदा सख्‍ती बढ़ने ‘साहब’ और ‘मैडम’ का प्रेशर है कह कर अवैध निर्माण करा रहे लोगों से वसूली की रकम भी बढ़ाने का मौका भी मिल जाता है।

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