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आईजीआरएस से जुड़े मामलों के निस्तारण में लखनऊ विकास प्राधिकरण फिसड्डी

आईजीआरएस से जुड़े मामलों के निस्तारण में लखनऊ विकास प्राधिकरण फिसड्डी

आईजीआरएस और सीएम हेल्पलाइन से जुड़े मामलों के निस्तारण में लखनऊ विकास प्राधिकरण फिसड्डी साबित हो रहा है, समय से शिकायतों का निस्तारण न करने में एलडीए की काफी बदनामी हो रही है। हर महीने शासन स्तर से आईजीआरएस प्रणाली का मूल्यांकन किया जाता है। तमाम लोग आईजीआरएस जनसुनवाई पोर्टल के माध्यम से प्राधिकरण से संबंधित अवैध निर्माण सहित तमाम शिकायतें करते हैं। जिनकी जांच कर मामले की रिपोर्ट देनी होती है, लेकिन लखनऊ विकास प्राधिकरण के गैर ज़िम्मेदार अधिकारीयों के चलते मुख्यमंत्री पोर्टल/आईजीआरएस पर की जाने वाली शिकायतों का संज्ञान प्राधिकरण के ज़िम्मेदार नहीं लेते है, अवैध निर्माण की शिकायत के मामलों में आई शिकायतों को बहुत दिनों तक दबा कर रखा जाता है, उनका जवान नहीं दिया जाता, कार्यालय स्तर पर लंबित कर अवैध निर्माण करने वालों को संरक्षण दिया जाता है, ज़्यादा शिकायत होने की दशा प्राधिकरण में बैठे भ्रष्ट अधिकारी गैर ज़िम्मेदाराना रुख इख्तियार करते हुए गलत रिपोर्ट लगाकर शासन और मुख्यमंत्री कार्यालय को गुमराह करने की कोशिश करते हैं, कार्रवाई करने के बजाय अवैध निर्माण करने वालों या जिनके खिलाफ हिकायत आई है उनसे सेटिंग करके गलत रिपोर्ट या गोलमोल जवाब लगा कर मामले को निस्तारित कर देते हैं.

ऐसे मामले लखनऊ विकास प्राधिकरण के जोन 1 में ज़्यादा दिखाई पड़ते हैं, यहाँ शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की जाती, शिकायतों का बण्डल बनाकर अधिकारी अपनी टेबल पर सजाये रखते हैं, शिकायत आने के साथ ही सम्बंधित अधिकारी जिसके खिलाफ शिकायत की जाती है उससे संपर्क करके उसको शिकायत कर्ता के बारे में और पूरी शिकायत को बता देते हैं, और अपनी जेब को गरम कर लेते हैं, साथ ही शिकायत को दबा कर शिकायतकर्ता को ही परेशंकरते हैं, और फिर उलटी सीढ़ी रिपोर्ट लगाकर मामले को निस्तारित कर देते हैं.

सरकार ने सूचना तकनीक का प्रयोग कर सुशासन के उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु विकसित ‘ई-संवाद’ एक समन्वित शिकायत निवारण प्रणाली बनाई थी, सरकार की सोच थी कि यह प्रणाली नागरिकों एवं शासन/विभागों/शासकीय कार्यालयों के बीच आसान एवं पारदर्शी तरीके से संवाद स्थापित करने में सहायक होगी, नागरिक किसी भी समय शिकायतों को ऑनलाइन दर्ज/ट्रैक कर सकेंगे|, विभिन्न माध्यमों से प्राप्त शिकायतें एक ही पोर्टल/प्लेटफ़ॉर्म पर उपलब्ध हो सकेंगी जिससे विभागीय अधिकारियों को शिकायतों के निस्तारण एवं अनुश्रवण की सुगम सुविधा उपलब्ध होगी, लेकिन हुआ इसका बिलकुल उलटा, विभागीय अधिकारियों ने तो इसको अपने लिए सुगम सुविधा बना ली, लेकिन आम नागरिक के लिए कठिनाई उत्पन्न कर दी, न पहले शिकायतों पर कोई कार्रवाई होती थी न आज ही शिकायतों पर कार्रवाई हो रही है।

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