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लखनऊ: विद्युत शवदाह गृह में लगी लंबी कतार, टोकन से हो रहा अंतिम संस्कार

लखनऊ। कोरोना के बढ़ते संक्रमण से मरने वालों की संख्या से विद्युत शवदाह गृहों पर लाइन भी लम्बी होती जा रही है। बीते दिनों से शव दहन के लिए लोगों को लम्बा इंतजार करना पड़ रहा है। शमशान घाट में लोगों को टोकन दिया जा रहा था। एक शव के अंतिम संस्कार में एक से डेढ़ घंटे का समय लगता है। यहां पर दो मशीनें हैं। लेकिन एक मशीन कई दिनों से खराब भी बताई जा रही। यह लगभग 35 वर्ष पुरानी हो चुकी है। उसे तीन दिन हो गए हैं लेकिन अभी तक ठीक नहीं हुई है। बैकुंठ धाम के कर्मचारियों ने कहा कि रविवार को भी यही स्थिति रहेगी। रातभर अंतिम संस्कार होता रहेगा। वहीं गुलाला घाट पर भी लोगों को नम्बर का टोकन दिया गया था। यहां पर भी देर रात तक कई शवों का अंतिम संस्कार किया गया। बैकुंठधाम में अपर नगर आयुक्त अमित कुमार पहुंचे तो समाजसेवी संस्था पॉवर विंग की अध्यक्ष सुमन सिंह रावत ने उन्हें मृतकों के परिजनों की समस्याएं बताते हुए छाँव के लिए एक टेंट और पानी की व्यवस्था कराने का आग्रह किया। इस पर अपर नगर आयुक्त समस्या सुनने के बजाय अपनी जिम्मेदारियों से भागने लगे और बिलबिला उठे। वह समाजसेवियों पर भड़क उठे और वहां से चले गए। अपर नगर आयुक्त ने बताया कि दो दिन से एक मशीन ख़राब थी उसे रिपेयर किया गया था लेकिन तीन शव जलाने के बाद वह फिर ख़राब हो गई, मशीन को जल्द ठीक करा लिया जायेगा।

कर्मचारियों की सुरक्षा दांव पर, वेतन भी नहीं दे रहा नगर निगम
दोनों विद्युत शवदाह गृहों पर कर्मचारियों की सुरक्षा दांव पर लगी हुई है। कर्मचारी बिना पीपीई किट के शवों को एम्बुलेंस से उठा रहे हैं और उनका अंतिम संस्कार कर रहे हैं। एक शव के अंतिम संस्कार में चार कर्मचारी लगते हैं। इस लिहाज से चार पीपीई किट की जरूरत होती है। लेकिन नगर निगम दोनों स्थानों पर मिलाकर 60-70 पीपीई किट उपलब्ध करा पा रहा है। जबकि मौजूदा समय में हर दिन लगभग 200 पीपीई किट की जरूरत है। मास्क व ग्लब्स भी नहीं है। कर्मचारियों को धुलकर काम चलाना पड़ रहा है। इस सम्बन्ध में अपर नगर आयुक्त अर्चना द्विवेदी ने कहा कि पीपीई किट की दिक्कत दूर हो गई है। हर दिन पर्याप्त संख्या में पीपीई किट भिजवाई जाएगी। साथ ही मास्क व ग्लब्स की भी पर्याप्त व्यवस्था कर दी गई है। नाम ना छपने की शर्त पर नगर निगम के कर्मचारी ने बताया कि कर्मचारी दिन रात अंतिम संस्कार करवाते हैं। समय पर खाना तक नहीं नसीब होता है, फिर भी विभाग समय पर वेतन नहीं दे रहा है इसके चलते परिवार पालना मुश्किल हो गया है।

कोरोना मरीजों के परिजनों को राहत बांट रहे समाजसेवी
जिस मरीज की कोरोना से मौत हो जाती है। उसके परिवार वालों के पास तक कोई जाने को तैयार नहीं होता है। ऐसे में बैकुंठधाम में चिलचिलाती धूप में पॉवर विंग्स फाउंडेशन की अध्यक्ष सुमन सिंह रावत अपने वॉलेंटियर के साथ लगातार मानवता भरा काम कर रही हैं। समाजसेवियों की टोली ने शनिवार को भयंकर धूप में भी कोरोना से मृत परिजनों को पानी की बोतल और मॉस्क बांटे। समाजसेवियों से 200 से अधिक लोगों को पानी की बोतल बांटकर उनकी पीड़ा सुनी तो वह दंग रह गए। आलमबाग से आये एक परिवार का बेटा कोरोना के चलते मर गया। पीड़ित परिवार को बैकुंठधाम में 12 नंबर टोकन दिया गया था। परिवार वाले सुबह ही आ गए थे लेकिन उसका अंतिम संस्कार शाम तक नहीं हो पाया था। परिजन भूखे प्यासे भटक रहे थे। पीड़ित परिवार की समस्या देख समाजसेवियों ने अपर नगर आयुक्त को समस्या बताई तो उन्होंने दुर्व्यवहार किया।

बैकुंठधाम के बाहर टेंट और पानी की व्यवस्था करने की मांग
बैकुंठधाम पर अंतिम संस्कार में शामिल होने आया एक बुजुर्ग भयंकर धूप के चलते चक्कर खाकर गिर गया। बुजुर्ग को बेहोश देख समाजसेवी दौड़े और उन्हें पानी पिलाया। वहां सैकड़ों की संख्या में आये लोगों ने नगर निगम से मांग की है कि मृतकों के परिजनों को धूप से बचाने के लिए एक टेंट और पानी की व्यवस्था करा दी जाए ताकि सभी धूप से बच सकें। इस संबंध में अपर नगर आयुक्त अमित कुमार ने बताया कि व्यवस्था कराई जाएगी।

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