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न टेस्ट, न बेड, न दवा, न टाइम पर ऐंबुलेंस ऐसा है लखनऊ का हाल

लखनऊ। राजधानी लखनऊ में कोरोना संक्रमितों की संख्या 5 हज़ार के पार हो गई है। हालात ये हैं कि अस्पतालों में न तो बेड खाली हैं और न ही किसी मंत्री विधायक या किसी बड़े अधिकारी की सिफारिश काम आ रही है।

शहर के सभी बड़े अस्पतालों में बेड फुल हैं तो वहीं शमशान घाट में भी लाशों की लंबी कतारें लगी हुई हैं। आलम तो ये है कि शवों के दाह संस्कार के लिए टोकन लेना पड़ रहा है और उसके बाद शव के अंतिम संस्कार का नंबर अगले दिन आ रहा है। हालात ये हैं कि प्रदेश सरकार के कानून मंत्री ने एक पत्र में इस बात का ज़िक्र किया कि उन्होंने किस प्रकार प्रसिद्ध इतिहासकार योगेश प्रवीन के इलाज के लिए आग्रह किया फिर भी उन्हें एंबुलेंस नहीं मिल पाई। अब ऐसे हालात तो इस ओर इशारा कर रहे हैं कि आने वाले समय में स्थिति और कितनी अधिक भयावह हो सकती है। इस बात का मरीजों की बढ़ती संख्या और उनको मिल रही इलाज की व्यवस्था के आधार पर आंकलन किया जा सकता है। प्रशासन भी इस बात को समझ रहा है इसलिए राजधानी में शव दाह के लिए 90 प्लेटफार्म तैयार किये जा रहे हैं। कोरोना पिछले साल भी था लेकिन इस बार कोरोना की दूसरी लहर ने अधिक तबाही मचाई हुई है। बैकुंठधाम के बाहर लगी लंबी लाइने इस चिंता और अधिक बढ़ा देती है। अब बात करें अस्पतालों की तो सबसे अधिक डॉक्टर ही कोरोना के चपेट में आ रहे हैं जिनमें वे जो कोरोना की दोनों डोज ले चुके हैं। केजीएमयू में सौ से अधिक स्टाफ संक्रमित है तो वहीं पीजीआई में भी डॉक्टरों के संक्रमित होने की संख्या कुछ कम नहीं है। जब अस्पताल में बेड फुल हैं तो इलाज के लिए मरीज कहां जाएं और जब शमशान घाट में टोकन लग रहा है तो शव दाह कहां किया जाएं। अब ऐसे में बेहतर तो यही एक वाक्य है कि आपकी सुरक्षा आप के हाथ। घर में रहकर खुदको सुरक्षित रखें और दूसरों को भी सुरक्षित रखें।

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