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नर नारी के संबंधों पर आधारित ‘पूर्ण पुरुष’ नाटक का हुआ मंचन

उ.प्र.संगीत नाटक अकादमी की अवध संध्या में नाट्य मंचन
नर-नारी के सम्बंधों और चाहत का आकलन करता-‘पूर्ण पुरुष’
कोविड-19 गाइड लाइन के तहत संग गाडगे प्रेक्षागृह में प्रस्तुति

लखनऊ। स्त्री-पुरुष के पारस्परिक सम्बंधों का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण करती नाट्य प्रस्तुति ‘पूर्ण पुरुष’ का मंचन दर्शकों को अभिभूत कर गया। विजय पण्डित के लिखे नाटक का मंचन विनोद रस्तोगी स्मृति संस्थान प्रयागराज के कलाकारों ने उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी की मासिक श्रृंखला अवध संध्या के अंतर्गत अजय मुखर्जी की संगीत परिकल्पना व निर्देशन में संत गाडगेजी महाराज प्रेक्षागृह अकादमी परिसर गोमतीनगर में किया।
इस अवसर पर कलाकारों और कलाप्रेमियों को सम्बोधित करते हुए विशेष सचिव संस्कृति व अकादमी के सचिव डा.दिनेशचन्द्र ने कहा कि इस अकादमी को महान गुणी संगीत,नृत्य व नाट्य कलाकारों का सानिध्य प्राप्त हुआ है। यहां का कार्यभार सम्भालने के बाद मेरा यह प्रयास है कि अकादमी गतिविधियों तथा अन्य संसाधनों से प्रदेश की कलाओं का और प्रचार-प्रसार हो। साथ ही कलाकारों को ज़्यादा से ज़्यादा लाभ मिले।
साहित्य कला परिषद नई दिल्ली द्वारा मोहन राकेश पुरस्कार प्राप्त इस चर्चित नाटक की कहानी में एक कलाकार के जीवन को उकेरा है। साथ ही नर और नारी की मानवीय कामना और उनके आपसी सम्बंधों को रूपायित किया है। नायक समग्र अपने ब्रश-कैनवस व रंगों से खेलते हुए नित्य नये चित्रों का सृजन करता है। उसे देवता स्वरूप मानकर शाश्वती उससे विवाह कर लेती है। कुछ समय बाद शाश्वती अपने एकरसता भरे जीवन से ऊब जाती है। वह जिन्दगी को अपनी तरह जीना चाहती है, सांसारिक सुख भोगना चाहती है। अतिरेक नामक युवक में उसे सबकुछ देने वाला एक पूर्ण पुरुष दिखाई देता है, वह उसके साथ चला जाती है। इस तरह कल्पना को रंगों में साकार करने वाला एक कलाकार अपने पारिवारिक जीवन में रंग नहीं भर पाता।
नाटक में मंच पर समग्र की भूमिका में निर्देशक मुखर्जी, शास्वती के रूप मे अपूर्वा गुप्ता, आस्थ के चरित्र में गरिमा कुशवाहा, अतिरेक की भूमिका में अक्षत अग्रवाल, शशांक के तौर पर आर्यन प्रकाश और बेयरा की भूमिका में आशीष यादव उतरे। मंच पाश्र्व के पक्षों में प्रकाश संयोजन में सुजाॅय घोषाल, संगीत संचालन में शुभम वर्मा, मंच निर्माण में अमन पाण्डेयष् आशीष यादव, रोहित यादव, आनन्दकर सिंह व अनुज नारायण का तथा अन्य पक्षों में मुख्य रूप से अभिलाष नारायण व सौरभ शुक्ला का रहा। नाटक का मंचन कोविड-19 के प्रोटोकाल के अंतर्गत किया गया तथा मंचन का प्रसारण अकादमी फेसबुक पेज पर भी किया गया।

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