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प्रदेश में नहीं है नर्सों के वेकेन्सी

लतिका मिश्रा ने अपने पैर पर खडो होने पर घर का सहारा बनने के लिए जीएनएम का डिप्लोमा किया। पिता ने डिप्लोमा कराने के लिए एक बीघा खेत भी बेचा । पढाई पूरी होने के बाद दो साल तक कही कोई जांब नहीं मिला। एक नर्सिंग होम में तीन हजार में 12 से 15 घंटे का काम मिला। इसी बीच एक संस्थान में आउटसोर्सिग में नौकरी मिली लेकिन सेलरी 15 हजार ऐसे में खुद का खर्च निकाल पाना ही संभव नहीं हो पा रहा है। ऐसी स्थित केवल एक लतिका की नही है । हजारों है जिन्होंने नर्सिग में डिप्लोमा किया लेकिन पाच से सात हजार में नौकरी करने को मजबूर है।

पीजीआई नर्सिग एसोसिएशन की अध्यक्ष सीमा शुक्ला कहती है कि प्रदेश में केवल 13 हजार सरकारी नौकरी है जो फुल है। जब जरूरत नहीं है तो डिप्लोमा क्यों कराया जा रहा है। मेडिकल विवि, लोहिया , पीजीआइ सहित तमाम निजि संस्थान बीएससी नर्सिग और जीएनएम करा कर बेरोजगार ट्रेड नर्सेज की फौज खडी कर रहे हैं। इस प्रोफेशन में सबसे अधिक लड़कियां है । टीएनआई के सदस्य डा. अजय कुमार सिंह का कहा कि मेडिकल प्रोफेशन में डिप्लोमा करने के मामले में 13.7 फीसदी लड़कियां है । उत्तर प्रदेश में एक लाख पांच 263 नर्स पंजीकृत है । सरकारी क्षेत्र के पीएमएस में लगभग 10 हजार और चिकित्सा शिक्षा में तीन हजार नौकरी है । इस तरह कुल तेरह हजार नौकरी है । इससे साफ है कि पंजीकृत हजारों नर्सेज बेरोजगार है लेकिन प्रदेश में ट्रेनिंग लगातार जारी है।

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