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विश्व पर्यावरण दिवस स्पेशल : कोरोना काल में पर्यावरण ने ली राहत की सांस !

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आज पूर विश्व पर्यावरण दिवस मना रहा है। पूरा विश्व 5 जून को पर्यावरण की सुरक्षा और संरक्षण हेतु पर्यावरण दिवस मनाता है। कोरोना संकट के चलते इस बार का पर्यावरण दिवस इंसानों को बड़ी सीख दे रहा है। प्रकृति के साथ छेड़छाड़ करने वाला मनुष्य इस वायरस के सामने घुटने टेकता नजर आ रहा है। विश्व के सभी वैज्ञानिक रात-दिन एक करके इस संकट से निजात दिलाने में लगे हुए हैं। कोरोना वायरस के चलते हुए लॉकडाउन ने आसमान को साफ कर दिया, नदियों को साफ कर दिया। पर्यावरण को स्वच्छ कर दिया। जिस पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए सरकारों के साथ पर्यावरणविद् भी चिंतित थे। सरकार ने अरबों-खरबों रुपयें विभिन्न परियोजनाओं में खर्च कर दिये थे, लेकिन उसका कोई सार्थक परिणाम नहीं निकला। कहते हैं कि प्रकृति जब नाराज होती है तो वह अपने ढंग से बदला लेती है, कुछ ऐसा ही हुआ जब कोरोना वायरस से पैदा हुई वैश्विक महामारी ने पूरी दुनिया को दहशत में डाल दिया। प्रकृति से छेड़छाड़ करने वाला मनुष्य अपने घरों में कैद हो गया। और पर्यावरण को वो मिल गया जिसकी उसे दरकार थी।

विश्व पर्यावरण दिवस का इतिहास:

इस दिवस को मनाने की घोषणा संयुक्त राष्ट्र ने पर्यावरण के प्रति वैश्विक स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक जागृति लाने हेतु वर्ष 1972 में की थी। इसे 05 जून से 16 जून तक संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा आयोजित विश्व पर्यावरण सम्मेलन में चर्चा के बाद शुरू किया गया था। 05 जून 1974 को पहला विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया।

इसमें हर साल 143 से अधिक देश हिस्सा लेते हैं और इसमें कई सरकारी, सामाजिक और व्यावसायिक लोग पर्यावरण की सुरक्षा, समस्या आदि विषय पर बात करते हैं। इस दिन लोगों को जागरूक करने के लिए काई प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं जैसे कि पेड़ लगाना, लोगों को इनकी महत्‍वता बताना आदि।

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